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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था। 



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Get correct and accurate information on property listings on bhaskarproperty.com
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डिजिटल डेस्क, मुंबई। टाटा हाउसिंग ने ज़ीरो स्टांप ड्यूटी के साथ एक नई योजना की घोषणा की है। ये योजना उन ग्राहकों के लिए जो महाराष्ट्र में प्रोजेक्ट के लिए कंस्ट्रक्शन लिंक्ड पेमेंट प्लान का लाभ उठा रहे हैं। यह महाराष्ट्र सरकार के स्टाम्प शुल्क को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत करने के निर्णय के बाद आया है।  

ज़ीरो स्टांप ड्यूटी की नई योजना को एक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा यदि कोई ग्राहक पहले से चल रही योजना का लाभ नहीं उठाना चाहता है। हालांकि, दोनों योजनाओं को एक साथ नहीं जोड़ा जा सकता है। यह योजना 31 अक्टूबर, 2020 तक लागू रहेगी। प्रोजेक्ट में सेरीन (पोखरण रोड 2, ठाणे), अमांत्रा (कल्याण भिवंडी कॉरिडोर), न्यू हेवन बोइसर II (बोइसर (ई), एनआर मुंबई), ला मोंटाना (तालेगांव, एनआर पुणे) और प्रिव (लोनावाला) शामिल हैं।

टाटा रियल्टी और इन्फ्रास्ट्रक्चर के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अमित परशुरामका ने कहा, राज्य सरकार के 1 सितंबर से 31 दिसंबर 2020 तक स्टैंप ड्यूटी को 5 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत करने और 1 जनवरी 2021 से 31 मार्च 2021 तक 2 प्रतिशत करने के निर्णय से वर्तमान बाजार का सेंटिमेंट बदलेगा।

उन्होंने कहा, 'हम, टाटा हाउसिंग में, होमब्यूयर को अपने बिजनेस के कोर में रखते हैं। होमबायर्स के सपनों के घर की क्वालिटी और कीमत के मामले में उनकी अपेक्षाओं को पूरा करने और अधिक से अधिक अवसरों की तलाश करते हैं। उन्होंने कहा, स्टांप ड्यूटी के अलावा सरकार की लागू नीतियों से अवसरवादी निवेशकों के लौटने की पूरी संभावना है। 



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Tata Housing announces new scheme with zero stamp duty for homebuyers
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। SBI कैपिटल आम्रपाली ग्रुप के छह अटके प्रोजेक्ट्स की फंडिंग करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को लगभग 7000 आवासीय इकाइयों की फंडिंग की रुकावट को दूर करते हुए हजारों घर खरीदारों को राहत दी। जस्टिस अरुण मिश्रा और यू यू ललित की बेंच ने चार हफ्ते के भीतर कानूनी ढांचा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इससे पहले रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सरकार के प्रायोजित स्ट्रेस फंड का प्रबंधन करने वाली SBICAP ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उसने आम्रपाली ग्रुप की छह रुकी हुई परियोजनाओं के लिए 625 करोड़ रुपये देने का फैसला किया है।

जिन छह आम्रपाली परियोजनाओं के लिए निर्माण कार्य शुरू किया गया है उनमें सिलिकॉन वैली -1 और 2, क्रिस्टल होम्स (Crystal Homes), सेंचुरियन पार्क लो राइज (Centurian Park Low Rise), सेंचुरियन पार्क ओ 2 वैली (Centurian Park O2 Valley)और सेंचुरियन पार्क ट्रॉपिकल गार्डन (Centurian Park Tropical Garden) शामिल हैं, जिनमें लगभग 6970 रेजिडेंशियल यूनिट्स होंगे।

इससे पहले सोमवार को हुई सुनवाई में एसबीआई कैपिटल की तरफ से ब्याज दर को कम करने में असमर्थता जताने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा था कि वह ब्याज दर कम करने के लिए हस्तक्षेप करें। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को वित्त मंत्रालय से निर्देश लेने के लिए कहा था कि क्या ब्याज दर को कम किया जा सकता है? जस्टिस अरुण मिश्रा और यूयू ललित की बेंच के समक्ष एसबीआई के वकील हरीश साल्वे ने कहा था कि ब्याज दर को कम करना 'संभव' नहीं है। 

साल्वे ने कहा था कि 12% ब्याज सामान्य है क्योंकि यह रिस्क इन्वेस्टमेंट का मामला है। हालांकि, बेंच ने कहा था कि बैंक को लाभ कमाने के वेंचर के रूप में नहीं लेना चाहिए क्योंकि 12% ब्याज बहुत अधिक है और एसबीआई कैप को ब्याज के रूप में पांच साल में 180 करोड़ रुपये मिलेंगे। इसके बाद कोर्ट ने कहा था कि अगर सरकार और एसबीआई कैप ब्याज दर घटाने के लिए अनिच्छा व्यक्त करते हैं तो वह आदेश पारित करेगा।



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SC okays SBICAP’s proposal to fund six stalled project of Amrapali Group
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। समय से ग्राहक को पजेशन नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट ने डीएलएफ सदर्न होम्स को हर्जाना देने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने DLF को आदेश दिया है कि वह 6 फीसदी सालाना ब्याज बॉयर्स को दे। DLF को यह पेमेंट एक महीने में करना होगा। इससे ज्यादा देरी होने पर पेमेंट करने तक 9 फीसदी इंटरेस्ट के साथ पेमेंट करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने NCDRC के फैसले को अलग रखा, जिसने 2 जुलाई, 2019 को 339 फ्लैट खरीदारों की शिकायतों को खारिज करते हुए कहा था कि वे उस मुआवजे के हकदार नहीं हैं, जो अग्रीमेंट में शामिल नहीं है।

2009 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
खरीदारों ने बेंगलुरु में डीएलएफ सदर्न होम्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ आवासीय फ्लैट बुक किए थे, जिसे अब बेगुर ओएमआर होम्स प्राइवेट के नाम से जाना जाता है। इस प्रोजेक्ट को 27.5 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा था और इसमें 1980 यूनिट शामिल थीं। प्रोजेक्ट के तहत उन्नीस टावर बनाए जाने थे, जिनमें से प्रत्येक में एक अठारह मंजिलें थीं। 2009 में इस परियोजना को शुरू किया गया था और इसे 36 महीने में बन जाना था। लेकिन तबसे कई बार डेट बढ़ चुकी है। खरीदारों ने फ्लैटों के कब्जे को सौंपने में देरी के कारण NCDRC का रुख किया था और मुआवजे की मांग की थी। 

NCDRC ने माना था कि खरीदारों को फ्लैटों को सौंपने में देरी की गई। लेकिन अग्रीमेंट में हर महीने देरी के लिए सुपर एरिया के 5 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से मुआवजा प्रदान करने की बात कही गई थी। इस वजह से NCDRC  ने यह कहा था कि अग्रीमेंट की शर्त के अनुसार फ्लैट खरीदने वाले इसके अतिरिक्त कोई राशि लेने के हकदार नहीं है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि फ्लैट मालिक डेवलपर्स के साथ अपने अग्रीमेंट में निर्धारित राशि से अधिक की क्षतिपूर्ति के हकदार हैं। NCDRC के आदेश के खिलाफ डब्ल्यूजी सीडीआर आरिफुर रहमान खान और अन्य ने उनकी उपभोक्ता शिकायतों को खारिज किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर की थी।



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SC orders DLF Southern Homes to pay 6% interest on flat's cost for delay
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डिजिटल डेस्क, मुंबई। इंडियन रेलवे स्टेशन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (IRSDC) दक्षिण-मुंबई में प्रतिष्ठित छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस रेलवे स्टेशन पर कमर्शियल और रेसिडेंशियल डेवलपमेंट की योजना बना रहा है। यह डेवलपमेंट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मोड में किया जाएगा। इसके लिए बोलियां भी आमंत्रित की गई है। बता दें कि यह विक्टोरियन गॉथिक शैली में निर्मित 130 साल पुरानी राजसी इमारत है।

अधिकारियों ने कहा कि प्रतिष्ठित छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, जो कि यूनेस्को का मान्यता प्राप्त विश्व धरोहर स्थल है और मुंबई का सबसे बड़ा रेलवे टर्मिनल है, 1,642 करोड़ रुपये की लागत से विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ एक मेकओवर पाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट के तहत, कुछ रेलवे कार्यालयों को परिसर से बायकुला और वाडी बंडर यार्ड तक शिफ्ट करने और स्टेशन पर एक्सेस कंट्रोल सिस्टम बनाने की योजना है। 

60 और 99 सील की लीज पर मिलेगी भूमि
चयनित बोलीदाता रेलवे स्टेशन के रिडेवलपमेंट और आसपास की रेलवे भूमि पर कमर्शियल डेवलपमेंट के लिए 60 साल तक के लिए लीज के आधार पर काम करेगा। इसके साथ ही बोलीदाता को चयनित प्लॉट्स पर 99 साल तक की लीज के आधार पर रेसिडेंशिल डेवलपमेंट करने की अनुमति होगी। इसके साथ ही बोलीदाता को 60 साल के लिए स्टेशन का ऑपरेशन और मेंटेनेंस का काम दिया जाएगा।

आवेदन की आखिरी तारीख 22 अक्टूबर
प्री-बिड कॉन्फ्रेंस 22 सितंबर को शेड्यूल किया गया है, जबकि आवेदन करने की नियत तारीख 22 अक्टूबर है। अलर्टनेट इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) या फॉरेन इन्वेस्टमेंट फंड (FIF) भी इस प्रोजेक्ट में भाग लेने के लिए पात्र हैं। पूरी बोली प्रक्रिया दो चरण में होगी जिसमें रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन (RFQ) और रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) शामिल है। 

बोली लगाने के लिए 821 करोड़ की नेट वर्थ होनी चाहिए
फाइनेंशियल कैपेसिटी के मामले में बोली लगाने वाले के लिए पात्रता मानदंड पूर्व वित्त वर्ष की समाप्ति पर नेट वर्थ 821 करोड़ रुपये के करीब होना चाहिए। भूमि उपयोग में कोई बदलाव या पर्यावरण और वन मंत्रालय से पूर्व पर्यावरण मंजूरी की आवश्यकता नहीं है। आईआरएसडीसी स्थानीय अधिकारियों के परामर्श से मास्टर-प्लान और बिल्डिंग प्लान की मंजूरी के लिए सिंगल विंडो होगी।



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Maharashtra plans commercial, residential development at Mumbai's CSMT station
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डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP-RERA) ने पार्श्वनाथ समेत कुछ अन्य डेवलपर्स को पजेशन और रिफंड देने के लिए एक महीने का समय दिया है। RERA ने सभी प्रमोटर्स को दो सप्ताह के भीतर पोर्टल पर अपने आदेश अनुपालन के प्रमाण प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। इन डेवलपर्स में पार्श्वनाथ के अलावा सनसिटी हाई-टेक इन्फ्रास्ट्रक्चर, कृष्णा एस्टेट डेवलपर्स और कृष्णा इंफ्राहोम्स, कॉन्सेप्ट होरिजन इंफ्रा, वेव मेगासिटी सेंटर और यूनीबेरा डेवलपर्स है।

क्या कहा UP RERA ने?
अथॉरिटी ने प्रमोटरों के साथ RERA के रिफंड आदेश, RC की स्थिति, पजेशन के आदेश और अन्य के बारे में विचार-विमर्श किया। UP RERA के सदस्य बलविंदर कुमार ने कहा कि यह प्रमोटरों के लाभ के लिए है। अगर वह आदेशों का पालन नहीं करते हैं तो फिर रेरा अधिनियम की धारा 63 के तहत उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। अथॉरिटी ने प्रमोटरों को आज से सात दिनों के भीतर निम्नलिखित जानकारी शेयर करने का निर्देश भी दिए है:

1. पूरी की गई और चल रही परियोजनाओं की अनसोल्ड इन्वेंट्री। प्रमोटरों को टॉवर / ब्लॉक / पॉकेट वाइज जानकारी देनी होगी।

2. नक्शे में स्थान के साथ-साथ प्रत्येक परियोजनाओं में रिक्त भूमि (अनुपयोगी भूमि) का क्षेत्रफल।

3. प्रत्येक प्रोजेक्ट में अनयूज्ड FAR।

4. री-सेल की तारीख और वैल्यू के साथ शिकायतकर्ता की यूनिट का विवरण।

5. उपरोक्त 1-4 बिंदुओं पर मांगी गई जानकारी के अलावा, कंपनी के ऐसेट और प्रॉपर्टी का विवरण। इसमें कंपनी के स्वामित्व वाली भूमि/भूखंडों का विवरण भी देना होगा, जिस पर एक प्रोजेक्ट शुरू किया जाना है।



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UP-RERA gives Parsvnath Developers, others one-month to settle all disputes
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नोएडा अथॉरिटी ने मंगलवार को एक दर्जन से अधिक बिल्डरों के लिए पेंडिंग प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए समय सीमा 31 दिसंबर, 2021 तक बढ़ा दी। जीरो पीरियड पॉलिसी के तहत यह समय सीमा बढ़ाई गई है। इन बिल्डरों ने पहले जून 2021 के अंत तक घरों की डिलीवरी का आश्वासन दिया था। नोएडा अथॉरिटी की 199वीं बोर्ड बैठक के दौरान इस निर्णय को मंजूरी दी गई।

पिछले दिसंबर में घोषित जीरो पीरियड पॉलिसी के अनुसार, बिल्‍डरों को भूमि के बकाये पर दंडात्‍मक ब्‍याज का भुगतान करने से छूट दी गई थी। जितने साल उनके प्रोजेक्‍ट अटके थे, यह छूट उतने समय के लिए थी। हालांकि, यह नीति उन बिल्डरों के लिए लागू थी, जिनसे उम्‍मीद थी कि वे जून 2021 तक घरों को उपलब्‍ध करा देंगे। राज्‍य सरकार को अपेक्षा थी कि इस समय तक एक लाख हाउसिंग यूनिटों को तैयार कर लिया जाएगा।

एक आधिकारिक प्रेस नोट में कहा गया है, 'जिन डेवलपर्स ने अपने पेंडिंग प्रोजेक्ट को 31 दिसंबर 2021 तक पूरा करने का लिखित आश्वासन दिया है, उनके लिए जीरो पीरियड पॉलिसी के तहत समय सीमा को 30 जून, 2021 से बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2021 कर दिया गया है। 16 (भूमि) आवंटियों को 31 दिसंबर, 2021 तक अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के बारे में लिखित आश्वासन देने के लिए पत्र जारी किए गए हैं।

बोर्ड ने अथॉरिटी के वार्षिक बजट को भी मंजूरी दी। अथॉरिटी के लिए रेवेन्‍यू में 5,037 करोड़ रुपये का टार्गेट रखा है। वहीं, चालू वित्‍त वर्ष में खर्च के लिए 4,640 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान किया गया है। बयान में कहा गया है कि एक्सपेंडिचर में भूमि अध‍िग्रहण, विकास कार्य, स्‍वास्‍थ और शहरी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर की मरम्‍मत व रखरखाव, ग्रामीण विकास इत्‍यादि पर होने वाला खर्च शामिल है। बजट में भूमि अधिग्रहण के लिए फंडों को 600 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये कर दिया गया है। जबकि ग्रामीण विकास के लिए फंडों को 106 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 125 रुपये कर दिया गया है।

बता दें कि बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के कमीश्नर आलोक टंडन और गौतम बुद्ध नगर के तीन अलग-अलग अथॉरिटी के चेयरमैन ने की। नोयडा अथॉरिटी के सीईओ रितु माहेश्वरी, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ नरेंद्र भूषण और यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी के सीईओ अरुण वीर सिंह ने भी इस बैठक में भाग लिया। बोर्ड की मंजूरी के लिए 15 प्रस्तावों के अलावा 37 एजेंडों को बैठक के दौरान रखा गया। बता दें कि बोर्ड की 198वीं  बैठक अप्रैल में हुई थी।



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Builders get extension to complete pending projects in Noida till December 2021
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डिजिटल डेस्क, गांधी नगर। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने राज्य के पांच प्रमुख शहरों में 70 मंजिलों या उससे अधिक की इमारतों के निर्माण को मंजूरी दी है। सरकार ने मंगलवार को ये जानकारी दी। नए नियम उन संरचनाओं पर लागू होंगे जिनकी 100 मीटर से अधिक हाइट हैं। वर्तमान नियमों के अनुसार, राज्य में अब तक केवल 23 मंजिल ऊंची इमारत बनाने की मंजूरी थी। 

क्या कहा गया है ऑफिशियल रिलीज में
ऑफिशियल रिलीज में कहा गया है कि अब, राज्य सरकार ने अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, राजकोट और गांधीनगर में 70 या अधिक मंजिलों की इमारत के निर्माण की अनुमति देने के लिए सामान्य जीडीसीआर (जनरल डेवलपमेंट कंट्रोल रेगुलेशन) में संशोधन करने का निर्णय लिया है। प्रेस रिलीज में कहा गया है कि इस तरह की परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए एक विशेष तकनीकी समिति का गठन किया जाएगा।

मॉडल स्ट्रकचर का विंड टनल टेस्ट अनिवार्य 
100 से 150 मीटर के बीच की ऊंचाई वाली गगनचुंबी इमारत के निर्माण के लिए प्लॉट साइज 2,500 वर्गमीटर और 3,500 वर्गमीटर होना चाहिए, यदि प्रस्तावित ऊंचाई 150 मीटर से अधिक हो। विज्ञप्ति में कहा गया है कि नए नियमों के तहत आपदा प्रबंधन योजना तैयार करने के अलावा मॉडल स्ट्रकचर का विंड टनल टेस्ट अनिवार्य है। रूपानी ने भरोसा जताया कि नए नियम जमीन का पूरा उपयोग सुनिश्चित करेंगे और अंततः घरों की कीमतें कम करने में मदद करेंगे।



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Gujarat approves construction of high-rises of over 70 floors in five cities
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने शुक्रवार को अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ इनसॉल्वेंसी की कार्यवाही को अलग रखा और फैसला सुनाया कि कंपनी के प्रबंधन को उसके बोर्ड को वापस सौंप दिया जाए। NCLAT की तीन सदस्यीय बेंच ने ऑबजर्व किया कि डिक्री होल्डर को किसी कंपनी के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही शुरू करने के उद्देश्य से वित्तीय लेनदार नहीं माना जा सकता है। आम तौर पर, डिक्री संबंधित प्राधिकारी की ओर से जारी एक ऑफिशियल ऑर्डर है।

NCLT ने दिवालिया कार्यवाही का आदेश दिया था
अपीलेट ट्रिब्यूनल ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की दिल्ली बेंच के आदेशों को अलग रखा, जिसने 17 मार्च को अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एपीआईएल) के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया था और कंपनी के बोर्ड को रिप्लेस करते हुए एक इंटरिम रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त किया था। NCLT का निर्देश दो फ्लैट खरीदारों की दायर याचिका पर आया था, जिन्होंने संयुक्त रूप से लखनऊ में APIL के सुशांत गोल्फ सिटी में एक यूनिट बुक की थी। NCLT ने उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) के जारी किए गए रिकवरी सर्टिफिकेट के आधार पर APIL के खिलाफ दिवालिया याचिका को स्वीकार किया था। 

सुशील अंसल की दायर याचिका पर NCLAT का फैसला
अपीलेट ट्रिब्यूनल ने कहा कि एनसीएलटी ने दो खरीदारों की याचिका स्वीकार करने में गंभीर त्रुटि की। NCLAT 
ने कहा कि दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत डिक्री धारक निश्चित तौर पर कर्जदाता की परिभाषा के दायरे में आते हैं, लेकिन उन्हें वित्तीय कर्जदाता नहीं माना जा सकता है। अत: उनकी याचिका पर दिवालिया कार्यवाही नहीं शुरू की जा सकती है। अपीलेट ट्रिब्यूनल का निर्देश कंपनी के निदेशक और शेयरधारक सुशील अंसल की दायर याचिका पर आया है, जिसमें NCLT के आदेश को चुनौती दी गई थी।



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NCLAT sets aside insolvency proceedings against Ansal Properties & Infrastructure
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डिजिटल डेस्क, मुंबई। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये क्षेत्र कोरोनावायरस महामारी के प्रभाव से जल्दा उबर जाएगा। हालांकि इसके अल्पकालिक प्रभाव के बावजूद, विशेषज्ञों की सलाह है कि अगर आप इस सेक्टर से लाभ कमाना जारी रखना चाहते हैं तो आपको प्लानिंग और एक्जीक्यूशन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करना होगा।

यदि ब्याज दर और छूट की पेशकश ने आपको किराये की आय अर्जित करने के लिए एक संपत्ति में निवेश करने के लिए पर्याप्त आत्मविश्वास प्रदान किया है, तो आपको पोस्ट कोरोना वर्ल्ड में लाभ कमाने के लिए संभलकर फैसले लेना होगा। COVID-19 लॉकडाउन का मानव मनोविज्ञान पर एक स्थायी प्रभाव होने की संभावना है। ऐसे में भारत में किराये का बाजार और भी अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकता है।

सही लोकेशन चुनें
कई चीजों में से जो नहीं बदलेगी, जहां तक संपत्ति निवेश की लाभप्रदता का संबंध है, वो इसकी लोकेशन है। क्या देखा जाना बाकी है कि क्या वर्तमान संदर्भ में 'अच्छी' लोकेशन 'अच्छी' बनी हुई हैं या नहीं। प्रॉपर्टी चाहने वालों को लोकेशन के बारे में अच्छी खासी रिसर्च करना चाहिए। बिजनेस डिस्ट्रिक्ट और जॉब मार्केट के आसपास के क्षेत्र में प्रॉपर्टी, हमेशा महंगी होगी और इसलिए, उस लोकेशन से हमेशा आपको ज्यादा इनकम होगी।

हमेश स्पष्ट रहें कि आपको टार्गेट किराएदार कौन है?
प्रॉपर्टी ओनर को स्पष्टता होना चाहिए कि उनकी टार्गेट ऑडियंस कौन होंगे। प्रॉपर्टी के सिलेक्शन में ये काफी महत्वपूर्ण है। आइए हम मान लें कि आपने एक इलाके में किराये की प्रॉपर्टी खरीदी है जिसमें छात्रों की आबादी अधिक है, क्योंकि पास में विभिन्न शैक्षणिक संस्थान हैं। सामान्य सुविधाओं के साथ एक 3BHK घर, जल्दी से पीजी में बदल दिया जा सकता है, जिससे यह छात्रों के लिए एक आदर्श विकल्प बन सकता है। इसी तरह, 1BHK घर खरीदना बेहतर होगा, यदि आप पेशेवरों या कपल को अपनी प्रॉपर्टी रेंट पर देने की योजना बनाते हैं।

अपने किरायेदार के बैकग्राउंड को वैरिफाय करें
आपके वेंचर की पूरी सफलता, इस बात पर निर्भर करती है कि किरायेदार का वैरिफिकेशन कितनी मेहनत से किया गया है। प्रॉप्रटी ओवर को हमेशा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे अपनी प्रॉपर्टी को कानून के पालन करने वाले नागरिकों को दे रहे हैं, ताकि वह अपनी सुरक्षा बनाए रख सके। वहीं आपको अपने संभावित किरायेदार की मेडिकल हिस्ट्री के बारे में भी पता होना चाहिए। ऐसे इसलिए ताकि आप अदंजा लगा सके कि आने वाले समय में किराएदार को किराया देने में किसी तरह की कोई परेशानी तो नहीं आएगी।

सभी कागजी कार्रवाई को सुनिश्चित करें
किसी भी कानूनी या वित्तीय परेशानी से बचने के लिए, अपने रिकॉर्ड स्ट्रेट रखें। सभी नियमों का पालन करें। समय पर टैक्स भरें। यदि आप कई संपत्तियों के मालिक हैं और टैक्स का काम बहुत जटिल हो जाता है, तो एक अनुभवी चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) को नियुक्त करना आपके लिए सही होगा।



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How to keep your rental property profitable in a post-Corona world
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अनुज जैन को पिछले हफ्ते जेपी विश टाउन प्रोजेक्ट के इंटरिम रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) के रूप में बहाल किया था। इसके साथ ही अब, रजिस्ट्रेशन सेल ने बायर्स को पैसे जमा करने और अपनी प्रॉपर्टी को रजिस्टर करने के लिए कहा है। सुनवाई की अगली तारीख 31 अगस्त है।

आईआरपी जैन ने कहा कि हमने रजिस्ट्रेशन का काम शुरू कर दिया है। हमें पता चल जाएगा कि एक सप्ताह में कितने खरीदार अपने फ्लैट का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आगे आएंगे। हम इस पर काम कर रहे हैं। रजिस्ट्रेशन सेल के लेटर में खरीदारों को पैन कार्ड, एक एड्रेस प्रूफ और सोशल क्लब मेंबरशिप के लिए  आवंटियों और उनके परिवार के सदस्यों की अतिरिक्त तस्वीरें ले जाने के लिए कहा गया हैं।

लेटर में कोविड-19 से जुड़े दिशानिर्देश भी शामिल हैं। दिशानिर्देशों के अनुसार, सेक्टर 128 कार्यालय में रजिस्ट्रेशन की औपचारिकताओं के लिए केवल आवंटियों और सह-आवंटी को उपस्थित होना होगा। सभी आवंटियों को दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए पेन के अलावा फेस मास्क पहनने और अपने स्वयं के सैनिटाइजर ले जाने के लिए भी कहा गया है। सभी रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन अपॉइंटमेंट के अनुसार किए जाएंगे।

जेपी विश टाउन बायर्स के एडवोकेट रौनक जैन ने कहा, 'जिन खरीदारों के अपार्टमेंट पहले ही पूरे हो चुके हैं, उन्हें अब अपने फ्लैटों को रजिस्टर करने का मौका मिलेगा क्योंकि आईआरपी को पर्याप्त जिम्मेदारियों के साथ बहाल किया गया है। फ्लैटों की प्रतीक्षा कर रहे शेष खरीदारों के भाग्य का फैसला सुप्रीम कोर्ट में आने वाली सुनवाई में ही होगा। इस मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी।

विश टाउन की लंबे समय तक दिवालिया कार्यवाही के बाद, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने इस साल मार्च में राज्य के स्वामित्व वाले NBCC को लंबित फ्लैटों के लिए निर्माण अधिकार दिया था, लेकिन कंपनी ने NCLT के खिलाफ NCLAT, अपीलीय निकाय का रुख किया। उनका दावा है कि अतिरिक्त वित्तीय देनदारियों को जोड़ने के साथ रिजॉल्यूशन अग्रीमेंट को डिसऑनर किया गया है।

पिछले महीने, खरीदारों के एक समूह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) को निर्देश दिया गया था कि वह एनबीसीसी को विश टाउन टाउन प्रोजेक्ट में निर्माण शुरू करने के लिए राजी करे और जल्द से जल्द लगभग 20,000 लंबित फ्लैटों को पूरा करे। 6 अगस्त को अदालत ने परियोजना के संचालन की देखरेख करने वाली अंतरिम निगरानी समिति को भंग कर दिया और आईआरपी को बहाल कर दिया।



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At Jaypee Wish Town, registrations can now begin for completed flats
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डिजिटल डेस्क, पणजी। राजस्व विभाग ने गोवा में मिनिमम लैंड रेट को संशोधित किया है। नई कीमतें, जो कि 100 रुपये से 1,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर के दायरे में हैं, 17 अगस्त से लागू होंगी और 31 मार्च, 2021 तक लागू रहेंगी। लैंड रेट्स में यह संशोधन पांच साल से अधिक समय के बाद किया गया है। इससे पहले सरकार ने एक बार और लैंड रेट को बढ़ाने की कोशिश की थी लेकिन उस वक्त ये नहीं हो सका था।

प्रस्तावित बढ़ोतरी, वास्तविक लैंड रेट से बहुत कम
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भूमि की कीमत में प्रस्तावित बढ़ोतरी न्यूनतम और राज्य के विभिन्न हिस्सों में वास्तविक भूमि दर से बहुत कम है। ज़मीन की नई दरें S1 ज़ोन और 1,000sqm तक के क्षेत्र पर लागू होंगी। एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 2016-17 में, तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने वास्तविक दर के आधार पर बेस लैंड रेट को बढ़ाने की कोशिश की थी। लेकिन बिल्डरों की लॉबी ने इस कदम को नाकाम कर दिया था। उन्होंने बताया कि एक पूर्व राजस्व मंत्री भी बेस लैंड रेट को बढ़ाने के पक्ष में नहीं थे क्योंकि इससे सरकार की ओर से चार्ज की जाने वाली फीस में बढ़ोतरी हो जाती।


सोर्स-टाइम्स ऑफ इंडिया

तालुका के क्षेत्र तीन भागों को वर्गीकृत
तालुका के भीतर के क्षेत्रों को शहरी, विकासशील, ग्रामीण और तटीय के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
विकासशील और ग्रामीण श्रेणी के क्षेत्रों के लिए, बेस लैंड रेट में प्रस्तावित वृद्धि 100 रुपये से 200 रुपये प्रति वर्गमीटर के बीच है। अधिकारी ने कहा कि पेरनेम तालुका में मोपा में, जहां अंतरराष्ट्रीय ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बन रहा है, मौजूदा बेस रेट 500 रुपये प्रति वर्गमीटर है, जबकि नया प्रस्तावित बेस रेट 600 रुपये वर्गमीटर है।

इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट से जमीन के दामों में बढ़ोतरी
हालांकि, जब से इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की परियोजना ने आकार लिया, तब से इन जमीनों की दर में वृद्धि हुई है, जबकि अधिकांश हिस्सों का अधिग्रहण सरकार ने किया है। कुछ ने अपनी जमीन 5,000 रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से बेची है। राज्य के अन्य हिस्सों में भी स्थिति अलग नहीं है। उदाहरण के लिए, पणजी में कुछ वार्डों में, प्रस्तावित दर 6,000 रुपये है जब वास्तव में कीमत बहुत अधिक है।



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Goa government revises base land rate after give years
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में कई राज्यों ने अपने भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल कर दिया है और लोगों के लिए भू नक्शा या क्षेत्र का नक्शा, ऑनलाइन जांचना आसान हो गया है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और बिहार जैसे विभिन्न राज्यों में भू नक्शा की जांच कैसे कर सकते हैं। भू नक्शा एक इंडिपेंडेंट प्लेटफॉर्म है। तो, आप इसे डेस्कटॉप या अपने स्मार्टफोन पर उपयोग कर सकते हैं।

राष्ट्रीय भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (एनएलआरएमपी) के दो वैक्टरों को विलय करके, भारत सरकार ने राज्यों में भूमि रिकॉर्ड का प्रबंधन करने के लिए एक नया और कम्प्यूटरीकृत तरीका विकसित किया है। रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण से देश भर में भूमि विवादों को कम करने में मदद मिल रही है। इसके अलावा, इस कम्प्यूटरीकृत प्रणाली की मदद से आवश्यक्ता अनुसार कैडस्ट्राल रिकॉर्ड को एडिट किया जा सकता है। अभी तक, आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश, अप-टू-डेट भू नक्शे हैं।

आपको भू नक्शा की जांच क्यों करनी चाहिए?
कई राज्यों में भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल किया गया है और यह महत्वपूर्ण है कि आप निम्नलिखित कारणों से इनकी जांच करें:

वैधता: भू नक्शा से आपको भूखंड की वैधता के बारे में पता चल जाएगा और क्या आप इस पर निर्माण कर सकते हैं? कहीं यह सरकारी भूमि तो नहीं है इस बारे में भी आपको जानकारी मिल जाएगी।

ओनर वेरिफिकेशन: किसी विशेष प्लॉट के असली मालिक या मालिकों की सूची को सत्यापित करने के लिए भू नक्शा वेबसाइट का उपयोग करें। आप यह पहचानने में भी सक्षम होंगे कि कोई व्यक्ति आपको अवैध रूप से भूमि बेचने की कोशिश तो नहीं कर रहा है।

जमीन का साइज: जिस जमीन को खरीदने में आपकी दिलचस्पी है, उसका साइज, सीमा और सीमांकन जानना बहुत जरूरी है। आप इसका पता भु नक्शा सुविधा से लगा सकते हैं।

समय बचाएं: यह देखते हुए कि विभिन्न राज्यों में भू नक्शा सुविधा अब ऑनलाइन है, यह आपका बहुत समय बचाता है। जानकारियों को सत्यापित करने के लिए स्थानीय सरकारी कार्यालयों में कतार लगाने की आवश्यकता नहीं है।

ट्रूली डिजिटल: 19 राज्यों में भू नक्शा लागू किया गया है, जबकि 22 राज्यों के लिए डेटा कैप्चर कर लिया गया है। ऑनलाइन म्यूटेशन और डिजिटल हस्ताक्षर भू नक्शा को वास्तव में डिजिटल बनाते हैं।

MP भू नक्शा
मध्य प्रदेश में एक भूखंड या लैंड पार्सल के भू नक्शा को देखने के लिए, आपको आधिकारिक MP Bhulekh पोर्टल (यहां क्लिक करें) पर लॉगिन करना होगा।

UP भू नक्शा
राज्य में कहीं भी अपने लैंड पार्सल से संबंधित जानकारी के लिए आपको यूपी भू नक्शा वेबसाइट पर लॉग इन करना होगा। आप आप उत्तर प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट पर भी खसरा, खतौनी, किसी अन्य भूखंड के मालिक के विवरण के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं जिसे आप खरीदने की योजना बना रहें हैं।

भू नक्शा महाराष्ट्र
महाभूनक्शा भूमि के नक्शे से संबंधित सभी प्रासंगिक जानकारी होस्ट करता है। (आधिकारिक साइट पर जाने के लिए यहां क्लिक करें)। यह प्लेटफ़ॉर्म-इंडिपेंडेंट है और इसे डेस्कटॉप और मोबाइल के जरिए एक्सेस किया जा सकता है।

राजस्थान भू नक्शा
राजस्थान में अपनी संपत्ति का नक्शा प्राप्त करने के लिए आपको राजस्थान की भू नक्शा वेबसाइट पर जाना होगा (आधिकारिक वेबसाइट पर जाने के लिए यहां क्लिक करें)। यदि आपके पास राजस्थान में एक कृषि भूखंड या कोई भूमि पार्सल है और आप इसके बारे में किसी भी प्रकार की आधिकारिक जानकारी की तलाश में हैं, तो आप इस साइट पर ऐसा कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ भू नक्शा
नक्शा देखने के लिए आपको CG bhu naksha वेबसाइट पर लॉग इन करना होगा (यहां क्लिक करें)। हाल ही में, कलेक्टर ने सभी उप-विभागीय मजिस्ट्रेटों और तहसीलदारों को निर्देश दिया, कि अगले छह महीनों के भीतर नक्शा अपडेशन का काम पूरा करें। यह जमीन पर सभी भूमि-संबंधी परिवर्तनों को ट्रैक करने और सार्वजनिक उपयोग के लिए इसे डिजिटल बनाने के लिए किया गया है।

भू नक्शा बिहार
बिहार भू नक्शा वेबसाइट भूमि मानचित्र से संबंधित सभी सूचनाओं को होस्ट करती है (आधिकारिक साइट पर जाने के लिए यहां क्लिक करें)। केवल नालंदा, मधेपुरा, सुपौल और लखीसराय में भू नक्शा को ऑनलाइन अपडेट किया गया है। शेष क्षेत्रों के लिए, डेटा अभी भी डिजीटल और अप-टू-डेट होने की प्रक्रिया में है।

भु नक्शा झारखंड
झारखंड में किसी भी प्लॉट के नक्शे से संबंधित जानकारी के लिए, आप bhu naksha झारखंड वेबसाइट (यहां क्लिक करें) का उपयोग कर सकते हैं। किसी विशेष टुकड़े का मालिक कौन हैं, उक्त संपत्ति साइज और डायमेंशन और भूमि के नक्शे से आपको यह तय करने में मदद मिलेगी कि आपको उस विशेष भूखंड को खरीदना चाहिए या नहीं। यदि आप एक विक्रेता हैं, तो आप प्लॉट की स्पष्ट तस्वीर डाउनलोड कर खरीदार को दे सकते हैं। ताकि उसे प्लॉट की स्पष्ट तस्वीर मिल सके।



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All about bhu naksha in Indian states
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गुड़गांव स्थित एक रियल एस्टेट डेवलपर, सिग्नेचर ग्लोबल ग्रुप मार्च 2021 से पहले 10,000 यूनिट को लॉन्च करने की योजना बना रहा है। कोरोनावायरस महामारी फैलने से पहले ये टारगेट तय किया था और वह इसी पूर्व निर्धारित लक्ष्य के तहत आगे बढ़ेगा। बता दें कि सिग्नेचर ग्लोबल ग्रुप किफायती आवास परियोजनाओं (Affordable housing projects) में है।

इस महीने में दीन दयाल जन आवास योजना के तहत 800 से अधिक यूनिट को लॉन्च किया गया। यह हरियाणा सरकार की एक योजना है जिसके तहत सिग्नेचर ग्लोबल 2022 तक दो लाख अफोर्डेबल हाउसिंग यूनिट को विकसित करने का इरादा रखता है। कंपनी ने इस प्रोजेक्ट पर अब तक 400 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत दो साइज में यूनिट बनाई जा रही है। 1,081 sqft में फैले 3bhk यूनिट और 2 bhk जो 951 sq ft में फैली हैं। इन यूनिटों की कीमत लगभग 45 से 55 लाख रुपये है।  

सिग्नेचर ग्लोबल के फाउंडर और चेयरमैन ने कहा, 'हमने एक साल पहले जमीन का अधिग्रहण किया था। COVID-19 से पहले ही हमने HDFC कैपिटल, KKR जैसे वित्तीय संस्थानों को लाइन अप भी कर लिया था। इन संस्थानों ने हमारी परियोजना को सपोर्ट किया है।' उन्होंने दावा किया कि अफोर्डेबल हाउसिंग एक ऐसा सेगमेंट है जो महामारी से बुरी तरह प्रभावित नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, 30,000 अफोर्डेबल हाउसिंग यूनिटों को लॉन्च करने का हमारा लक्ष्य पटरी पर है। हमने अब तक 19,200 यूनिटें लॉन्च की हैं और मार्च 2021 तक 10,000 यूनिट लॉन्च करने का इरादा है। 5000 से अधिक यूनिट हरियाणा अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी के तहत हैं और दूसरी 5000 दीन दयाल जन आवास योजना के तहत हैं। हम 2021 तक सभी 30,000 यूनिटों को लॉन्च करने की स्थिति में होंगे।



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Affordable housing firm Signature Global plans launch of 10,000 units by March 2021
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नोएडा में कई हाई-राइज सोसाइटियों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की कमी है, जबकि कुछ सोसाइटियों में स्थापित प्लांट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिशानिर्देशों के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं। अधिकारियों ने रविवार को ये बात कही। जल प्रदूषण के संबंध में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेश का कितना पालन किया गया इसका निरीक्षण करने के लिए अधिकारी पहुंचे थे। अब नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों पर कार्रवाई करने की बात अधिकारियों ने कहा ही।

33 हाई-राइज सोसाइटियों में से अधिकांश सेक्टर 7x क्षेत्र में स्थित हैं (शहर के सेक्टर 74 से 79 में सोसाइटियों का उल्लेख करते हुए) और सेक्टर 137, जहां नोएडा प्राधिकरण ने 2 और 8 अगस्त को निरीक्षण किया था। अथॉरिटी ने एक बयान में कहा, निरीक्षण के दौरान, यह पाया गया कि ज्यादातर सोसाइटियों ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण नहीं किया है। इनमें सेक्टर 76 की स्काईटेक मैट्रॉट, आम्रपाली सिलिकॉन, सेक्टर 78 की असोटेक विंडसर कोर्ट, सिक्का कर्मी और आदित्य अर्बन कासा प्रमुख हैं।

बयान में कहा गया, 'कुछ सोसाइटियां जिनके पास एसटीपी हैं, वे कार्यात्मक हैं, लेकिन एनजीटी के दिशा-निर्देशों के अनुसार नहीं हैं। ऐसे सोसाइटियों में प्रमुख हैं सेक्टर 75 में स्थित सुपरटेक कैपिटाउन, अंतरिक्ष गोल्फव्यू- II, सनशाइन हाइट्स, एआईएमएस मैक्स गार्डेनिया, जीएच - 08। इसके अलावा सेक्टर 137 में स्थित मैक्स वैलिस, पारस टिएरा, ब्लॉसम काउंटी, अजनारा होम, और अंतरिक्ष फॉरेस्ट है।

अथॉरिटी ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनजीटी को जल संरक्षण अधिनियम, 1976 के तहत संबंधित बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक रिपोर्ट पेश की जा रही है। उन्होंने कहा, नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माने की राशि की गणना की जाएगी और उन्हें नोटिस भेजे जाएंगे। इस तरह के निरीक्षण भविष्य में भी जारी रहेंगे।



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Penalty soon on several high-rises without STPs: Noida authority
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आम्रपाली के खरीदारों को 10 साल से अधिक समय से घरों का इंतजार करने के बाद अब एक बड़ी राहत मिलने जा रही है। राज्य के स्वामित्व वाली एनबीसीसी ने कहा है कि वह पूरे टावरों के पूरा होने का इंतजार करने के बजाय, अगस्त से हर महीने कम से कम 150-200 फ्लैट सौंपने की कोशिश करेगी। एनबीसीसी के कार्यकारी निदेशक, रमन अग्रवाल ने टीओआई को बताया कि कंपनी ने जुलाई में 61 फ्लैटों को सौंप दिया था और इस महीने वह खरीदारों को अन्य 150 फ्लैट डिलिवर करेगी।

अधिकारी ने कहा, शुरू में हम टॉवर-वार हैंडओवर पर काम कर रहे थे, लेकिन फिर उन टावरों में इंडिविजुअल अपार्टमेंट सौंपना शुरू करने का फैसला किया, जिनमें रहने की स्थिति और दो लिफ्ट और पावर बैक-अप जैसी आवश्यक सुविधाएं हों। ऐसे कई इंडिविजुअल टॉवर हैं जहां कुछ लोग पहले से ही रह रहे हैं, इसलिए उन टावरों में फ्लैट की चाबियां सौंपने में कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा, महामारी के कारण हम कितना काम कर सकते हैं, इस पर निर्भर करते हुए, हम प्रति माह औसतन 150-200 फ्लैटों की डिलीवरी का लक्ष्य रखेंगे।

वर्तमान में चल रही आम्रपाली परियोजनाएं सिलिकॉन वैली I, प्रिंसीली एस्टेट, सफायर I और II, जोडिएक और प्लेटिनम और टाइटेनियम हैं। अधिकारियों ने कहा कि आने वाले महीनों में फ्लैट्स सिलिकन II, लीजर वैली विला, ड्रीम वैली विला, सेंचुरियन लो राइज, ओ 2 वैली, गोल्फ होम्स, किंग्सवुड और लीजर पार्क में सौंपे जाने की उम्मीद है, जो लगभग पूरा होने की कगार पर हैं।

एनबीसीसी के सीएमडी पीके गुप्ता ने कहा, 'हम आम्रपाली प्रोजेक्ट में लगातार प्रगति कर रहे हैं और हर महीने खरीदारों को चाबी सौंपी जाएगी। एनबीसीसी ने पूर्व में जनवरी 2021 से 44,000 लंबित आम्रपाली फ्लैटों की डिलीवरी शुरू करने का वादा किया था। यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा खरीदारों को अपना बकाया भुगतान करने का निर्देश देने के बाद किया गया था। 10 जुलाई को जारी एक आदेश में एनबीसीसी द्वारा दी गई कम्प्लीशन टाइमलाइन 2023 है।

मोटे तौर पर, कंपनी ने लंबित परियोजनाओं को तीन समूहों में विभाजित किया है। पहले समूह में जोडाइक, सफायर- I, सफायर- II, सिलिकॉन- I, प्रिंसली एस्टेट, प्लेटिनम और टाइटेनियम, और लीजर वैली विला शामिल हैं। इन सात परियोजनाओं की डिलीवरी की समय सीमा जनवरी 2021 और जून 2021 के बीच है।

डिलीवरी की जाने वाली परियोजनाओं का दूसरा समूह ड्रीम वैली विला, सिलिकन - II, सेंचुरियन पार्क -लोराइज और सेंचुरियन पार्क- O2 वैली हैं। इन अपार्टमेंटों की डिलीवरी की समयावधि फरवरी 2022 और जुलाई 2023 के बीच है। इस श्रेणी के लिए, खरीदारों को अगस्त 2020 और अप्रैल 2022 के बीच भुगतान करना होगा।

तीसरे समूह में, NBCC सेंचुरियन पार्क टैरेस होम्स, सेंचुरियन पार्क-ट्रॉपिकल गार्डन, स्मार्ट सिटी-गोल्फ होम्स, स्मार्ट सिटी-किंग्सवुड, सिलिकॉन सिटी-क्रिस्टल होम्स, लीजर वैली-वेरोना हाइट्स, लीजर वैली-आदर्श अवास योजना, ड्रीम वैली-फेज- II, ड्रीम वैली-एंचेंट, लीजर पार्क I, II और रिवर व्यू को डिलीवर करेगी। इस श्रेणी के लिए डिलीवरी की समयावधि फरवरी 2022 से जुलाई 2023 तक है। एनबीसीसी के पास आम्रपाली परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 8,500 करोड़ रुपये का बजट आउटले है और खरीदारों से इसकी प्राप्ति 3,200 करोड़ रुपये है।



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NBCC to hand over 200 Amrapali flats a month from August
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