डिजिटल डेस्क, मुंबई। देश की अर्थव्यवस्था के लिए बुरी खबर है। कोविड-19 महामारी के प्रभाव से चालू वित्त वर्ष (2020-21) में जीडीपी में 7.7 फीसदी की गिरावट आने का अनुमान है। 1952 से अब तक के देश के इतिहास में पहली बार जीडीपी में इतनी बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी। इससे पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 4.2 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई थी। यह जानकारी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ओर से जारी आंकड़ों में सामने आई है।

NSO की ओर से गुरुवार को जारी राष्ट्रीय आय के पहले अग्रिम (एडवांस्ड) अनुमान में कहा गया है कि कृषि को छोड़कर अर्थव्यस्था के लगभग सभी क्षेत्रों में गिरावट आएगी। NSO के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 9.4 फीसदी की गिरावट रहने का अनुमान है, जबकि एक साल पहले इस सेक्टर में ग्रोथ केवल 0.03 फीसदी रही थी। ‘खनन व उत्खनन’ में 12.4% और ‘ट्रेड, होटल, ट्रान्सपोर्ट, कम्युनिकेशन और ब्रॉडकास्टिंग संबंधी सेवाओं’ में 21.4% की गिरावट दर्ज की जा सकती है। मौजूदा वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र में 3.4 फीसदी की ग्रोथ रहने का अनुमान है। हालांकि यह वित्त वर्ष 2019-20 में दर्ज की गई 4 फीसदी की ग्रोथ से कम है।
जीडीपी की 7.7 फीसदी की गिरावट का ये अनुमान भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के अनुमान से भी ज्यादा है। आरबीआई ने दिसंबर में कहा था कि 2020-21 में वास्तविक जीडीपी में 7.5 फीसदी की गिरावट आ सकती है। हालांकि आरबीआई ने इसके पहले जीडीपी में 9.5 फीसदी गिरावट का अनुमान लगाया था। वहीं विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की जीडीपी में 9.6 फीसदी गिरावट का अनुमान लगाया है। विश्व बैंक ने अपनी ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स की रिपोर्ट में कहा कि भारत उस समय महामारी की चपेट में आया था जब उसकी अर्थव्यवस्था में पहले से ही गिरावट दिख रही थी।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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