डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। फूड प्रोडक्ट की बढ़ती कीमतों के कारण सितंबर में खुदरा महंगाई दर पिछले महीने के 6.69 प्रतिशत से बढ़कर 7.34% हो गई। सीपीआई अधारित महंगाई का यह पिछले आठ महीनों में दर्ज उच्चतम स्तर है। फरवरी में यह 6.58% थी। फूड प्रोडक्ट की महंगाई दर अगस्त में 9.05% थी जो सितंबर में बढ़कर 10.68% हो गई। अर्थव्यवस्था के एक अन्य प्रमुख बैरोमीटर, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन अभी भी निगेटिव जोन में है। इसमें 8 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसका मुख्य कारण मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और पावर जनरेशन सेक्टरों का लोअर आउटपुट है। अगस्त 2019 में IIP में 1.4 प्रतिशत का कॉन्ट्रेक्शन देखा गया। जुलाई में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में 10.4 प्रतिशत की गिरावट आई थी।

खुदरा महंगाई दर का ट्रेंड
इनमें हुई बढ़ोतरी और इनमें आई गिरावट
सेंट्रल स्टेटस्टिक्स ऑफिस आंकड़ों के मुताबिक कंज्यूमर फूड प्राइज इंफ्लेशन अगस्त के 9.05% के मुकाबले बढ़कर 10.68% पर पहुंच गया। सब्जियों की महंगाई दर भी 11.41% से बढ़कर 20.73% हो गई है। दालों की महंगाई दर 14.44% के मुकाबले बढ़कर 14.67% हो गई। कपड़ों और जूतों की महंगाई दर 2.77% के मुकाबले बढ़कर 3.04% हो गई। गिरावट की बात करें तो फ्यूल एंड लाइट इन्फ्लेशन अगस्त के 3.10% के मुकाबले घटकर 2.87% हो गई है। अगस्त में हाउसिंग इंफ्लेशन 3.10% था जो सितंबर में घटकर 2.83% पर पहुंच गया। अनाज की महंगाई दर में भी मामूली गिरावट देखी गई है। महीने दर महीने के आधार पर अनाज की महंगाई दर 5.92% के मुकाबले 4.68% हो गई।
क्या होता है CPI इंडेक्स?
CPI यानि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक। यह रिटेल महंगाई का इंडेक्स है। रिटेल महंगाई वह दर है, जो जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। यह खुदरा कीमतों के आधार पर तय की जाती है। भारत में खुदरा महंगाई दर में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी की करीब 45% है। दुनिया भर में ज्यादातर देशों में खुदरा महंगाई के आधार पर ही मौद्रिक नीतियां बनाई जाती हैं। भारत में खुदरा महंगाई दर में खाद्य और पेय पदार्थ से जुड़ी चीजों और एजुकेशन, कम्युनिकेशन, ट्रांसपोर्टेशन, रीक्रिएशन, अपैरल, हाउसिंग और मेडिकल केयर जैसी सेवाओं की कीमतों में आ रहे बदलावों को शामिल किया जाता है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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