डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख बैरोमीटर, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन अभी भी निगेटिव जोन में है। अगस्त में इसमें 8 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसका मुख्य कारण मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और पावर जनरेशन सेक्टरों का लोअर आउटपुट है। अगस्त 2019 में IIP में 1.4 प्रतिशत का कॉन्ट्रेक्शन देखा गया।र जबकि जुलाई में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में 10.4 प्रतिशत की गिरावट आई थी।
साल दर साल के आधार पर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर प्रोडक्शन में अगस्त 2020 में -1.7% के मुकाबले -8.6% , माइनिंग में -9.8 के मुकाबले -9.8% और पावर में -0.9 के मुकाबले -1.8% की गिरावट आई है। प्राइमरी गुड्स 1.0 फीसदी से घटकर -11.1 फीसदी हो गया। कैपिटल गुड्स -20.9 से बढ़कर -15.4 हो गया। इंटरमीडियेट गु्ड्स 7.3% से घटकर -6.8% हो गया। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स -9.7% से -10.3% हो गया। जबकि नॉन कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 3.1% से घटकर -3.3% हो गया।
मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन ने एक बयान में कहा कि COVID 19 महामारी से पहले के महीनों की IIP के साथ बाद के महीनों में IIP की तुलना करना उचित नहीं होगा। प्रतिबंधों में धीरे-धीरे मिली छूट से आर्थिक गतिविधियों में सुधार आया है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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