Dainik Bhaskar Hindi - bhaskarhindi.com, नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के कुछ प्रावधानों के उल्लंघन के लिए HDFC बैंक पर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। एक आधिकारिक बयान में, केंद्रीय बैंक ने कहा कि कार्रवाई रेगुलेटरी कंप्लायंस में कमियों पर आधारित है। यह किसी भी तरह से ग्राहकों के साथ बैंक की डीलिंग को प्रभावित नहीं करेगा।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक एचडीएफसी बैंक के ऑटो लोन पोर्टफोलियों में अनियमितताओं की शिकायत व्हिसिल ब्लोअर के माध्यम से आरबीआई को मिली थी। जब आरबीआई ने बैंक ग्राहकों को थर्ड-पार्टी नॉन-फाइनेंशियल प्रोडक्ट की मार्केटिंग और सेल से संबंधित दस्तावेज एग्ज़ामिन किए तो गड़बड़ियों का खुलासा हुआ। इसे लेकर आरबीआई ने एचडीएफसी बैंक को शो कॉज नोटिस जारी कर पूछा है कि उन पर जुर्माना क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए?
शॉ कॉज नोटिस पर बैंक के जवाब, पर्सनल हियरिंग के दौरान ओरल सब्मिशन और दोबारा डॉक्यूमेंट्स के एग्ज़ामिनेशन के बाद आरबीआई इस निष्कर्ष पर पहुंची की अनियमितताओं की शिकायत सही है। इसके बाद बैंक पर 28 मई 10 करोड़ रुपए मॉनिटरी पेनाल्टी लगाई गई।
बता दें कि एचडीएफसी बैंक ग्राहकों को ऑटो लोन के साथ जीपीएस डिवाइस खरीदने के लिए मजबूर करता है। यहां तक कि ग्राहक जब तक जीपीएस डिवाइस खरीदने को तैयार नहीं होते ऑटो लोन अप्रूव नहीं होता है। इस जीपीएस डिवाइस की कीमत 18,000 रुपए है। इसे मुंबई की एक कंपनी ट्रैकपॉइंट जीपीएस ने बनाया है।
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RACHNA SAROVAR
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