डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार को डेवलपमेंट फाइनेंस इंस्टीट्यूशन (DFI) को स्थापित करने वाले बिल को मंजूरी दी। इसके जरिए इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश करने के लिए फंड जुटाया जा सकेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को पेश गिए गए बजट में इसका ऐलान किया था। सरकार ने इंस्टीट्यूशन को कैपिटलाइज करने के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया है। कैबिनेट की बैठक के बाद सीतारमण ने कहा, इसके जरिए हमारे पास एक संस्थान और संस्थागत व्यवस्थाएं होंगी, जो लंबी अवधि के फंड को बढ़ाने में मदद करेंगी। प्रस्तावित DFI में 50 फीसदी गैर-आधिकारिक निदेशक होंगे।
बजट में हुआ था प्रावधान
- वित्त मंत्री ने इस साल अपने बजट भाषण में DFI के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किए जाने का ऐलान किया था।
- मंत्री ने बताया था कि DFI को स्थापित करने के लिए एक बिल पेश किया जाएगा।
- यह इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग में काम आएगा।
- सीतारमण ने यह भी एलान किया था कि वे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के लिए 1,18,101 लाख करोड़ रुपये आवंटित कर रही हैं।
- ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए भी आवंटन को बढ़ाकर 40 हजार करोड़ करने का एलान किया गया, जो वित्त वर्ष 2021 में 30 हजार करोड़ था।
बैंकों के निजीकरकण को लेकर क्या बोलीं सीतारमण
वहीं बैंकों के निजीकरण के विरोध में सरकारी बैंकों के हड़ताल के बीच केंद्रीय निर्मला सीतारमण ने कहा कि सभी बैंकों का निजीकरण नहीं होगा। जिनका होगा भी, हम ये सुनिश्चित करेंगे कि लोगों की नौकरी और बाकी हितों का ख्याल रखा जाए। वित्तमंत्री ने कहा कि जिन बैंकों का निजीकरण होने की संभावना है उनके निजीकरण होने के बाद भी कार्य जारी रहेगा और कर्मचारियों की इंटरेस्ट की भी रक्षा होगी। बता दें कि पब्लिक सेक्टर के नौ बैंकों की यूनियन, यूनाइडेट फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स ने इस हड़ताल का एलान किया है। इस बार बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया था कि इस साल सरकार दो सरकारी बैंकों और एक इंश्योरेंस कंपनी का निजीकरण करेगी।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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