डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बीते दो वर्षों से 2000 के नोटों की छपाई नहीं की गई है। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को संसद में यह अहम जानकारी दी। एमडीएमके सांसद ए गणेशमूर्ति ने एक सवाल में पूछा था कि क्या सरकार को इस तथ्य के बारे में पता है कि लोगों के बीच 2000 के नोटों का सर्कुलेशन बहुत कम हो गया है और यह बैंकों और एटीएम में भी उपलब्ध नहीं है?
क्या कहा वित्त राज्य मंत्री ने?
वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस सवाल के जवाब में बताया कि 20 मार्च 2018 तक 2000 मूल्य वर्ग के 336.2 करोड़ कंरसी नोट सर्कुलेशन में थे। जोकि सिस्टम में कुल वॉल्यूम का 3.27 फीसदी है। वहीं, 26 फरवरी 2021 तक के आंकड़ों के अनुसार सर्कुलेशन में 2000 मूल्य वर्ग की 249.9 करोड़ करंसी थी, जोकि सर्कुलेशन में कुल कंरसी का 2.01 फीसदी रह गया है। ठाकर ने बताया कि रिजर्व बैंक के परामर्श के बाद सरकार एक खास मूल्यवर्ग के बैंक नोट की छपाई का फैसला करती है। इसमें जनता की तरफ से लेनदेन के संबंध में आ रही डिमांड को ध्यान में रखा जाता है।
पहली बार नवंबर 2016 में छपे थे 2000 के नोट
- देश में 2000 रुपये के करंसी नोट पहली बार नंवबर 2016 में छापे गए।
- सरकार ने 500 और 1000 रुपये के करंसी नोटों को सर्कुलेशन से वापस ले लिया था।
- सरकार ने इसके बाद 2000 रुपये मूल्य वर्ग के नोट छापने का फैसला किया था।
- नोटबंदी का मकसद काला धन और जाली करंसी पर लगाम लगाना था।
- बाद में सरकार ने 500 रुपये के भी नए नोट सर्कुलेशन में उतारे।
- लेकिन, 1000 रुपये के बैंक नोट अभी तक दोबारा चल में शुरू नहीं किए गए।
- फिलहाल, सिस्टम में 2000 रुपये के अलावा, 500, 100, 50, 20, 10 और 5 रुपये के नोट चलन में हैं।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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