डिजिटल डेस्क, मुंबई। बैंकों को लेकर आरबीाई ने गंभीर चेतवनी दी है। भारत में बैंकों का बैड लोन रेशियो बेसलाइन स्ट्रेस सिनेरियो में 600 बेसिस पॉइंट बढ़कर 13.5% तक पहुंच सकता है। अगर मैक्रोइकोनॉमिक इनवॉयरमेंट और बिगड़कर सीवियर स्ट्रेस सिनेरियो में तब्दील होता है तो ग्रॉस एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स) रेशियो बढ़कर सितंबर 2021 तक 14.8 फीसदी हो सकता है, जो कि 25 साल का उच्च स्तर होगा। आरबीआई ने सोमवार को छमाही फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट जारी की, जिसमें ये बात कही गई है।
बेसलाइन सिनेरियो के तहत, यह 23 साल का हाई होगा। बैंकों का ग्रॉस बैड लोन रेशियो 30 सितंबर 2020 में 7.5 फीसदी रहा। वहीं मार्च 2020 में यह 8.4% था। आरबीआई के डेटा के मुताबिक पिछली बार बैंकों ने इस तरह का एनपीए 1996-97 में देखा था। उस समय यह 15.7% था। दरअसल, कोरोना महामारी इकोनॉमी पर कहर बनकर टूटी है। इसमें कई लोगों की नौकरी चली गई और वो बेरोजगार हो गए। इस वजह से कई लोग बैंकों से लिया कर्ज चुका नहीं पाए।
वहीं अगर केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बात की जाए तो बेसलाइन सिनेरियो के तहत GNPA रेशियो सितंबर 2020 में 9.7 फीसदी था। यह सितंबर 2021 तक बढ़कर 16.2 फीसदी हो सकता है। सितंबर 2020 में निजी क्षेत्र के बैंकों और विदेशी बैंकों में GNPA रेशियो 4.6 फीसदी और 2.5 फीसदी था। जो सितंबर 2020 में बढ़कर क्रमश: 7.9 फीसदी और 5.4 फीसदी हो सकता है।
छमाही फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट में कहा गया है कि सीवियर स्ट्रेस सिनेरियो में GNPA रेशियो सितंबर 2021 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बढ़कर 17.6 फीसदी, निजी क्षेत्र के बैंकों में 8.8 फीसदी और विदेशी बैंकों में 6.5 फीसदी हो सकता है। वहीं आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास के अनुसार कोरोना के कारण सरकार को रेवेन्यू कम मिल रहा है। खर्च करने के लिए वह बाजार से ज्यादा कर्ज ले रही है। इससे बैंकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
क्या होता है एनपीए?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक यदि किसी बैंक लोन की किस्त या लोन 90 दिनों तक यानी तीन महीने तक नहीं चुकाया जाता तो उसे नॉन परफॉर्मिंग एसेट (NPA) मान लिया जाता है। अन्य वित्तीय संस्थाओं के मामले में यह सीमा 120 दिन की होती है। यानी अगर किसी लोन की ईएमआई लगातार तीन महीने तक न जमा की जाए तो बैंक उसे एनपीए घोषित कर देते हैं। एनपीए का मतलब यह है कि बैंक उसे फंसा हुआ कर्ज मान लेते हैं। एनपीए बढ़ना किसी बैंक की सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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