डिजिटल डेस्क, मुंबई। टाटा समूह के सबसे बड़े माइनोरिटी शेयरहोल्डर अरबपति मिस्त्री परिवार ने इस ग्रुप से अलग होने का मन बना लिया है। मिस्त्री परिवार ने कहा, टाटा ग्रुप ने शेयरों पर उधार लेने के उनके परिवार के प्रयास को ब्लॉक किया है। ऐसे में अब हितों को अलग करने की जरूरत है। मिस्त्री और टाटा परिवार पिछले करीब एक साल से शेयरों को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है। टाटा ग्रुप ने इस विवाद को खत्म करने के लिए मिस्त्री परिवार की हिस्सेदारी खरीदने का ऑफर दिया था। इन दोनों ग्रुप के रिश्ते करीब 70 साल पुराने है।
टाटा संस में 18 फीसदी हिस्सेदारी
बता दें कि पलौंजी मिस्त्री और उनके परिवार का शापूरजी पलौंजी ग्रुप पर नियंत्रण है। इस ग्रुप की टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में 18 फीसदी हिस्सेदारी है। एसपी ग्रुप पर मार्च 2019 तक 30,000 करोड़ रुपये से अधिक कर्ज था। मिस्त्री परिवार की अपने कर्ज के भुगतान के लिए टाटा संस में अपनी कुछ हिस्सेदारी गिरवी रखकर 1 अरब डॉलर जुटाने की योजना थी। लेकिन टाटा समूह को लगता है कि ऐसा करने में जोखिम है। इससे ऐसे निवेशकों के हाथ शेयर लग सकते हैं जो आगे चलकर कंपनी के हितों के खिलाफ काम कर सकते हैं।
शापूरजी पलौंजी ग्रुप की हिस्सेदारी खरीदने को तैयार टाटा
टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि वह नकदी संकट से जूझ रहे शापूरजी पलौंजी ग्रुप की 18 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने को तैयार है। टाटा संस के वकील ने बताया कि शापूरजी पलौंजी ग्रुप अपने कर्ज के भुगतान के लिए हिस्सेदारी बेचने के बजाय शेयर गिरवी रखकर उधार लेना चाहता है। सुप्रीम कोर्ट ने मिस्त्री ग्रुप से कहा है कि वह 28 अक्टूबर तक टाटा समूह को कोई शेयर नहीं बेचेगा और न ही उसे गिरवी रखेगा। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर से शुरू होगी।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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