नई दिल्ली, 27 अगस्त (आईएएनएस)। शेयर बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 73.80 के स्तर पर बंद हुआ, जिससे यह पिछले तीन महीनों में सबसे मजबूत मुद्रा रहा है, जो पांच महीने के उच्च स्तर पर बंद हुआ।
रुपये की मजबूती मजबूत पोर्टफोलियो इनफ्लो और शेयर बाजारों में मार्च की नीचे के स्तर से हुई मजबूत रिकवरी से जुड़ी है।
हालांकि कोविड-19 महामारी के कारण आर्थिक गतिविधियां बाधित हुई हैं और आर्थिक संकेतक अभी भी धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं। इस वास्तविकता के विपरीत, शेयर बाजार सरपट दौड़ रहा है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गुरुवार को बड़े स्तर पर 49 पैसे या 0.66 फीसदी की बढ़त के साथ 73.81 पर बंद हुआ, जो 11 मार्च के बाद से इसका सबसे ज्यादा बंद होने का रिकॉर्ड है।
अप्रैल में रुपये अपने सर्वकालिक निम्न स्तर 76.91 पर पहुंच गया था, जिसमें अब 3.43 प्रतिशत की रिकवरी हुई है। लेकिन इस वर्ष अब तक अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले यह 4.03 प्रतिशत लुढ़का है।
हाल ही में अग्रणी बैंकों ने क्यूआईपी के जरिए फंड जुटाया है।
विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) ने मार्च में घबराहट के दौरान, 65,000 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। अब मई-अगस्त के दौरान सकारात्मक देखने को मिला और इसने अकेले अगस्त में 37,000 करोड़ रुपये की भारी खरीद के साथ 75,000 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के तकनीकी विश्लेषक चंदन तापारिया ने कहा कि निफ्टी ने अगस्त महीने में सकारात्मक संकेत दिए हैं।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगस्त सीरीज में इंडिया वीआईएक्स में 23.59 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह 24.73 से बढ़कर 18.89 के स्तर पर पहुंच गया।
वहीं विदेशी ब्रोकरेज नोमुरा ने हालिया रिपोर्ट में कहा कि आर्थिक सुधार की धीमी गति बताती है कि कुछ क्षेत्रों में रिकवरी पूर्व-महामारी के स्तर तक पहुंचने से बहुत पहले स्थिर हो सकती है।
प्राइम डाटाबेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, जून में समाप्त तिमाही के दौरान घरेलू म्यूचुअल फंडों का शुद्ध आउटफ्लो 1,944 करोड़ रुपये रहा।
एकेके/एसजीके
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RACHNA SAROVAR
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